विजय दिवस था कल एक बूढी लाठी के आगे नतमस्तक हुए शाह–वजीर अचरज से देख रहे थे कबाड़े से निकल आई गाँधी टोपियों का कमाल सिर पर रखते ही हरीशचन्द्र बन रहे थे लोग जिन्हें लेख का शीर्षक भी पता नही टीकाकार बन ग… more →
स्वार्थwrote 1 year ago: विजय दिवस था कल एक बूढी लाठी के आगे नतमस्तक हुए शाह–वजीर अचरज से देख रहे थे कबाड़े से निकल आई गाँधी ट … more →
wrote 1 year ago: भ्रष्टाचार के विरुद्ध बहती हुयी गंगा में आज हर कोई हाथ धोने के लिए तत्पर है केवल यह दिखाने के लिए कि … more →