कैसे कैसे हादसे सहते रहे, हम यूँही जीते रहे हँसते रहे, उसके आ जाने की उम्मीदें लिए, रास्ता मुड़ मुड़ के हम तकते रहे, वक्त तो गुजरा मगर कुछ इस तरह, हम चरागों की तरह जलते रहे, कितने चेहरे थे हमारे आस-पा… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: कैसे कैसे हादसे सहते रहे, हम यूँही जीते रहे हँसते रहे, उसके आ जाने की उम्मीदें लिए, रास्ता मुड़ मुड़ … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: दोस्ती जब किसी से की जाए, दुश्मनों की भी राय ली जाए, मौत का ज़हर है फिजाओं में, अब कहाँ जा के साँस ल … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: बेबसी जुर्म है हौसला जुर्म है, ज़िंदगी तेरी एक-एक अदा जुर्म है, ऐ सनम तेरे बारे में कुछ सोचकर, अपने ब … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: अपने होठों पर सजाना चाहता हूं आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूं कोई आसू तेरे दामन पर गिराकर बूंद को मोत … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: जब किसी से कोई गिला रखना सामने अपने आईना रखना यूं उजालों से वास्ता रखना शमा के पास ही हवा रखना घर की … more →