कुछ-कुछ होता है सनम जब-जब तुमसे मिलते हैं कैसे कहें हम सनम तुमसे मोहब्बत करते हैं… दिल डरता है लब सीं रखते हैं ख़ामोशी से आँखों को पढ़ते हैं हर आहट पर दिल धड़कता है यह तुमसे अकीदत करता है कुछ-कु… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: कुछ-कुछ होता है सनम जब-जब तुमसे मिलते हैं कैसे कहें हम सनम तुमसे मोहब्बत करते हैं… दिल डरता है … more →
विनय wrote 1 year ago: यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी हर पल तुमको मैंने प्यार किया हर लम्ह … more →