Blogs about: India

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लोकलुभावन वायदों वाला भारतीय रेलवे बजट 2009 और सम्मोहित जनता

योगेन्द्र wrote 9 hours ago: “पहली तारीख है जी पहली तारीख है । खुश है जमाना आज पहली तारीख है । …” ये बोल हैं किसी बहुत पुरा … more →

Tags: जनतंत्र, भारत, राजनीति, लोकतंत्र, शासन, democracy, Government, Politics

सुरेन्द्र दुबे - अमेरिका बनाम भारत का योगदान

Vision Raval wrote 4 days ago: … more →

Tags: सुरेन्द्र दुबे, हास्य रंग, america, News

आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मनोरंजन, मस्तराम, समाज, साहित्य

कितनी सार्थक हिंदी की ‘राजभाषा’ उपाधि - राजनीति हिंदी विरोध की1 comment

योगेन्द्र wrote 4 days ago: (मई 17, 2009 की पोस्ट के आगे) अपने देश की संघीय ‘राजभाषा’ हिंदी एवं विभिन्न प्रदेशों की अपनी-अपनी ‘र … more →

Tags: भारत, भाषा, राजनीति, राजभाषा, हिन्दी, hindi, भारतीय संघ, राज्यभाषा, संविधान

सि़यों की कम संख्या उनके प्रति बढ़ते अपराधों के लिये जिम्मेदार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: देश में प्रतिदिन ही महिलाओं के प्रति किये गये अपराध समाचारों की सुर्खियां बन रहे हैं। हालत यह हो ग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्त राम, शब्द, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, bharat

आज 21 जून फादर्स डे - जून का तृतीय रविवार3 comments

योगेन्द्र wrote 1 week ago: आज ‘फादर्स डे’ (Fathers’ day) है । मदर्स डे की भांति यह भी पश्चिम से अपने देश में आयातित एक और … more →

Tags: उत्सव, परंपरा, भारत, Festival, अंताराष्ट्रीय पुरुष, फादर्स डे, विरासत, सोनारा लुई स्मार्ट, FATHERS DAY

कितनी सार्थक है हिंदी की ‘राजभाषा’ उपाधि?1 comment

योगेन्द्र wrote 2 weeks ago: पिछले कुछ समय से मैं एक प्रश्न का ‘संतोषप्रद’ उत्तर (महज उत्तर नही, संतोषप्रद उत्तर!) पाने की चेष्टा … more →

Tags: अंग्रेजी, भारत, राजभाषा, हिन्दी, English, hindi, भारतीय संविधान, संविधान सभा, हिंदी दिवस

नस्लवाद और गुणों का स्वरूप-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: शायद कुछ समाज सुधारकों को यह बुरा लगे पर सच यही है कि इस धरती पर पैदा हर जीव की नस्ल होती है और उसमे … more →

Tags: writer, aritile in hindi, हिंदी आलेख, Hindi writing, Blogger, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web bhaskar, web jagran

what is between mulayam and reservation: they are "just friends"5 comments

Sudeep Pandey wrote 3 weeks ago: The flag-bearer of reservation in school/collage/govt. jobs/private jobs and where not for ST/SC/OBC … more →

Tags: Current Affairs, Nation, Irony, Mulayam, Politics, Women reservation bill

समूह की गुलामी से मुक्ति ही है असली आज़ादी-चिंत्तन आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अगर किसी समुदाय का एक जोड़ा अपने किसी दूसरे समुदाय की रीति के अनुसार विवाह करता है तो क्या उस समुदाय … more →

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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-दुष्ट अमीर शासन को परेशान करता है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्र … more →

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चाणक्य नीति-जो विद्या काम की न आये उसे पाना व्यर्थ

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ————————- हर्त ज्ञार … more →

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संत कबीर वाणी-मूर्ख लोग सभी की पीड़ा एक समान नहीं मानते

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पीर सबन की एकसी, मूरख जाने नांहि अपना गला कटाक्ष के , भिस्त बसै क्यौं नांहि संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →

Tags: alekh, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, bharat, Deepak bharatdeep, dharm

मेहनतकश की कलम से-चिंतन आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भूतपूर्व मजदूर की डायरी से-आलेख जिन लोगों ने जीवन में कभी मजदूरी या मेहनतकश बनकर पैसा नहीं कमाया उन … more →

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श्री गुरुवाणी-सत्संग से विचार निर्मल होते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: ‘जो जो कथै सुनै हरि कीरतन ता की दुरमति नासु।’ सगन मनोरथ पावै नानक पूरन होवै आसु।।’’ हिंदी में भावार् … more →

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बदलाव-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वहां महफिल जमी हुई थी। अनेक विद्वान समाज की समस्याओं पर विचार करने के लिये एकत्रित हो गये थे। एक वि … more →

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भर्तृहरि शतक-बेइज्जती से भी भूख कहाँ मिटती है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किंचित्फलं त्यकत्वा जातिकुलाभिमानमुचितं सेवा कृता निष्फला। भुक … more →

Tags: आलेख, इंडिया, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हिंदी साहित्य, हिन्दी, Blogger, Blogging

विदुर नीति-दुष्ट को अपना राज बताना खतरनाक

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धर्माऽऽख्याने श्मशाने च रोगिणां या मतिर्भवेत्। सा सर्वदैव तिष्ठेयेत् को न मुच्येत बंधानात्।। हिंदी म … more →

Tags: अध्यात्म, दीपक भारतदीप, साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep, inlglish, Internet, jagran, mastram

रहीम दास के दोहे-बुराई का नतीजा सामने जरूर आता है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई हो … more →

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