मेघा आज फिर टुटके बरसे तुम मीत से माटी से ‘महक’ ऊठी , इश्क में सराबोर निकली | ================================ ये क्या हुआ ‘महक’, दीवानगी की सारी हदे पार कर ली सावन में… more →
mehekmehhekk wrote 5 months ago: मेघा आज फिर टुटके बरसे तुम मीत से माटी से ‘महक’ ऊठी , इश्क में सराबोर निकली | == … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ख्वाब अँखियों की पलकों में समाए ये रहते मन में छिपी बातों को हमसे ये कहते कुछ स्याह कुछ इंद्रधनु से … more →
mehhekk wrote 2 years ago: सोलहवा सावन रिमझिम खनकती बूँदे , जब आंगन में आती है उन भीगे लम्हो को , संग अपने लाती है | बचपन की ला … more →