विनय wrote 1 year ago: यह कैसा लम्हा है यह कैसा एहसास है तू पलकों में क़ैद है दिल के पास है क्या देखूँ तेरे सिवा क्या चाहूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: वह मौसम इक बार फिर सजा दे प्यार करने की मुझको सज़ा दे दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ हाथों की लकीरों … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो दिल की सदा साँसों के सिलसिले कहते हैं तुम मेरे हो तुम मेरे हो यह … more →
विनय wrote 1 year ago: इक मौक़ा दो तुम मुझे कि बता सकूँ कितना टूटकर प्यार करता हूँ तुमसे तुम्हें जो चाहिए सब दूँगा मैं प्यार … more →