खुद के लिए भी क्या जीना है.. सब जी कर भी क्या करते हैं.. प्रतिस्पर्धा में खो जाते हैं.. आखिर घुट-घुट कर ही तो मरते हैं.. जीना कोई काम नहीं.. करना है अगर तो नाम करो.. मदद करो, उपकार करो.. मेहनत, सुबह… more →
मेरे मनोभावshakechiller wrote 4 months ago: खुद के लिए भी क्या जीना है.. सब जी कर भी क्या करते हैं.. प्रतिस्पर्धा में खो जाते हैं.. आखिर घुट-घुट … more →
shakechiller wrote 4 months ago: सच से ना भाग क्योंकि भाग्य को नहीं कोसना है.. हर सवाल का जवाब तुझे खुद से ही पूछना है.. शंका में क्य … more →
shakechiller wrote 4 months ago: जीवन कठिन है ये मैंने जाना है.. राह में कितनी ही रुकावटों को पाना है.. चोट मैं खाऊंगा लेकिन आंसूं न … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नन्हे से दीपक में सजाई बाती रौशनी चारों तरफ,निखरी हुई ज्योति हर पल तप तप कर तुम हो जाना प्रखर दीप तु … more →