ऑफिस जाते जहाँ न डर हो एक कल जो आज से बेहतर हो रेड लाइट जहाँ कोई भूखा न हो पानी का नल जो सूखा न हो पढाई जो हर बच्चे तक पहुंचे कानून के दरवाज़े न हो ऊँचे नेता जो अपनी जिम्मेदारी समझे जनता को पैसे से प्य… more →
Vikasvardhan's Weblogvikasvardhan wrote 7 months ago: ऑफिस जाते जहाँ न डर हो एक कल जो आज से बेहतर हो रेड लाइट जहाँ कोई भूखा न हो पानी का नल जो सूखा न हो प … more →
vikasvardhan wrote 8 months ago: जो कल कफ़न बांटता था आज वो नेता बन गया वो इन्सां तो न बन सका पर आज नेता बन गया वोट देने मैं घर से निक … more →
vikasvardhan wrote 1 year ago: मेरे जनाजे पे खूब रोये मेरे रोने वाले नज़ारा देखके मैं भी गमगीन था पूछा खुदा ने तब हंसकर मुझसे क्या ख … more →
vikasvardhan wrote 2 years ago: पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण हर कोना घर का जलने लगा अहिंसा की झीनी चादर में वो अपने डर को ढकने लगा खुदा … more →
vikasvardhan wrote 2 years ago: इन माटी के रिश्तों को, वो माटी में ही भूल चला यूं लाज वतन की रखने को, वो तन से बन धूल चला गुलशन को स … more →
vikasvardhan wrote 2 years ago: स्वाधीन वतन को करना था, यह दुनिया को जता दिया दब गई सत्तावन की चिंगारी हर दिल को लेकिन जगा दिया बारू … more →
vikasvardhan wrote 2 years ago: मेरी वादी में तो बस आंसू के दरिया बहते हैं उन खिले खिले से चेहरों में कुछ खून के प्यासे रहते हैं कब … more →