दीदार खुश है मेरी बन्नो,आज मधुचंद्र की रात सज सवर कर बैठी है नही करती किसीसे बात कुछ भी कहो ,गुलाब सी शरमाए पलकों को झुकाए,नयनो से मुस्कुराए शायद मेरी बन्नो,थोड़ी सी इतराए पवन के छूअन से भी,थोड़ी सी… more →
mehhekk wrote 2 years ago: दीदार खुश है मेरी बन्नो,आज मधुचंद्र की रात सज सवर कर बैठी है नही करती किसीसे बात कुछ भी कहो ,गुलाब … more →
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