Blogs about: Jagran

Featured Blog

रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 11 hours ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →

Tags: adhyatm, alekh, Anubhuti, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, मस्तराम, शब्द

सि़यों की कम संख्या उनके प्रति बढ़ते अपराधों के लिये जिम्मेदार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: देश में प्रतिदिन ही महिलाओं के प्रति किये गये अपराध समाचारों की सुर्खियां बन रहे हैं। हालत यह हो ग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्त राम, शब्द, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, bharat

चाणक्य नीति-जो विद्या काम की न आये उसे पाना व्यर्थ

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ————————- हर्त ज्ञार … more →

Tags: आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, हिन्दी, editoriyal, Enternment, hindi litreture

श्री गुरुवाणी-सत्संग से विचार निर्मल होते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: ‘जो जो कथै सुनै हरि कीरतन ता की दुरमति नासु।’ सगन मनोरथ पावै नानक पूरन होवै आसु।।’’ हिंदी में भावार् … more →

Tags: adhyatm, alekh, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, सन्देश, साहित्य

विदुर नीति-दुष्ट को अपना राज बताना खतरनाक

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धर्माऽऽख्याने श्मशाने च रोगिणां या मतिर्भवेत्। सा सर्वदैव तिष्ठेयेत् को न मुच्येत बंधानात्।। हिंदी म … more →

Tags: अध्यात्म, दीपक भारतदीप, साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep, India, inlglish, Internet, mastram

रहीम दास के दोहे-बुराई का नतीजा सामने जरूर आता है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई हो … more →

Tags: अनुभूति, रहीम, सन्देश, हिन्दी, Deepak bharatdeep, hindi litreture, India, inlglish, Internet

संत कबीर वाणी:मिल बाँट कर खाएं वही हैं वीर

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: संत कबीर महाराज कहते हैं कि ———————– कबीर तो सांचै म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, शब्द, सन्देश, Deepak bharatdeep, dharm, hindi litreture, hindi writer

संत कबीर वाणीः अच्छा खाने को मिले तो भी बेवकूफ की संगत न करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय खीर खीड भोजन मिलै, साकट संग न जाय संत कबीर दास जी कहते हैं कि साधु … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, सन्देश, हिन्दी, हिन्दू

भर्तृहरि नीति शतक-भगवान ने दिया है मौन रहने का गुण

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————- स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, bhruthari shatak

भर्तृहरि नीति शतक: कुत्ता हड्डी चबाते हुए इन्द्र देवता की परवाह नहीं करता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————– कृमिकुलचितं लालाक्लिन् … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, alekh, Anubhuti, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम

भर्तृहरि शतकः हंसों का मूल गुण परमात्मा भी नहीं छीन सकता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अम्भोजिनी वनविहार विलासमेव हंसस्य हंति नितरां कुपितो विधाता। न त्वस्य दुग्धवाभेदविधौ प्रसिद्धां वें … more →

Tags: adhyatm, अध्यात्म, दीपक भारतदीप, धर्म, शब्द, Deepak bharatdeep, hindi litreture, hindi writer, India

रहीम दास के दोहे: पशु अपना हित करने वाला गुड़ कभी नहीं खाते

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कविवर रहीम कहते हैं रहिमन आलस भजन में, विषय सुखहिं लपटाय घास चरै पसु स्वाद तै, गुरु गुलिलाएं खाय म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दोहे, मस्त राम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, bharat

भर्तृहरि नीति शतक: जिनकी देह,मन और विचार में अमृत हो ऐसे लोग नगण्य

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: मनसि वचसि काये पुण्यपीयूषपूर्णास्त्रिभुवनमुपकारश्रेणिभिः प्रीणयन्तः परगुणपनमाणून्पर्वतीकृत्य नित्यं … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, शब्द, साहित्य, हिन्दी

चुनाव से सम्बन्धित रिपोर्टिंग के लिए प्रेस परिषद के दिशा - निर्देश3 comments

अफ़लातून wrote 2 months ago: प्रेस का यह कर्तव्य होगा कि चुनाव तथा प्रत्याशियों के बारे में निष्पक्ष रिपोर्ट दे । समाचारपत्रों स … more →

Tags: Internet, online journalism, Politics, News, capitalism, recessation, election, media, Print Media

चुनावों में अखबारों की गलीज भूमिका27 comments

अफ़लातून wrote 3 months ago: दीवाल  -  लेखन  नहीं , परचे नहीं , नुक्कड़ सभायें पहले से कहीं कम , इसके बावजूद  चुनाव खर्च की ऊपरी स … more →

Tags: capitalism, election, media, Politics, Print Media, democracy, Elections, Hindustan

वैलंटाईन डे का एक दिन में शोर थमा (हास्य-व्यग्य)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कल वैलंटाईन डे बीत गया। पिछले प्रदंह दिन से उसका प्रचार जोरदार ढंग से हुआ। आज अनेक खबरें इस बारे म … more →

Tags: चिंतन, अभिव्यक्ति, abhivyakti, editoriyal, Internet, Friends, Anubhuti, India, सन्देश

मंदी का दौर:नया उपभोक्ता वर्ग कहां से आयेगा-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: अमेरिका के उद्योगपति बिल गेट्स ने कहा है कि वर्तमान मंदी अगले चार साल तक चल सकती है। बिल गेट्स विश् … more →

Tags: हिन्दी, संपादकीय, अभिव्यक्ति, editoriyal, Internet, Friends, Anubhuti, India, सन्देश

आजाद होकर भी गुलाम खड़े मालिकों की कृपा के इंतजार में -हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: परदेस में पुजने से ही देश में भगवान बनेंगे कैसा यह उनका भ्रम है। देश के लोगों से मिले मान से क्या गौ … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, Internet, Friends, सन्देश, अनुभूति, साहित्य, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

रौशनी ने भी अपने रूप बदले हैं-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: निकले थे अंधेरे में माटी के चिराग ढूंढने पर कांच के बल्ब के टुकड़े लग गये पांव में रौशनी ने भी अपने … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शेर-ओ-शायरी, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “jagran”:
Technorati Del.icio.us IceRocket