जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो… वक़्त के क़तरे बहते रहते हैं हम भी तेरे नशेमन में रहते हैं आवाज़ देना हमें हम लौट आयेंगे जायें भी तो और कहाँ जायेंगे जाने दो ज… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो… वक़्त के क़तरे बहते रहते … more →