झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा रात आधी आधी माहताब आधा आधा देखनेवालों संभल … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 6 months ago: झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा रात आ … more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ तेरी आँच में मै … more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया मसला द … more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: प्यार का आखरी अंदाज़ बाकी है दिल तोड़ने … more →