झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा रात आधी आधी माहताब आधा आधा देखनेवालों संभल जाओ ज़रा तुम है आज उनके रुख पे नक़ाब आधा आधा नज़र में हैं पर वो हासिल नहीं हैं है आधी हक़ीक़त सराब आधा आधा चेहरे पे यूँ छाई ज़ुल्फ़… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा रात आधी आधी माहताब आधा आधा देखनेवालों संभल जाओ ज़रा तुम है आज उनके र … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ तेरी आँच में मै जल रहा हूँ सहमा सहमा और धीरे धीरे बर्फ़ की मानिंद गल रहा हूँ अ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया मसला दिल का ऐसा उलझा कश्मीर हो गया वो आये मेरे करीब तो यारों यूँ ल … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: प्यार का आखरी अंदाज़ बाकी है दिल तोड़ने का रिवाज़ बाकी है मौत के फ़रिश्तों ज़रा कुछ पल ठहरो मेरे आखरी नमा … more →