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Blogs about: Jan 2007

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झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा

Rohit Jain wrote 1 year ago: झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा रात आधी आधी माहताब आधा आधा देखनेवालों संभल जाओ ज़रा तुम है आज उनके र … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, आधा, कविता, गज़ल, जैन, झाँके, रोहित

क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ

Rohit Jain wrote 1 year ago: क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ तेरी आँच में मै जल रहा हूँ सहमा सहमा और धीरे धीरे बर्फ़ की मानिंद गल रहा हूँ अ … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, कविता, गज़ल, जैन, पिघल, रहा, रोहित

कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया

Rohit Jain wrote 1 year ago: कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया मसला दिल का ऐसा उलझा कश्मीर हो गया वो आये मेरे करीब तो यारों यूँ ल … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, कर, कविता, कह, गया, गज़ल, जैन

प्यार का आखरी अंदाज़ बाकी है1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: प्यार का आखरी अंदाज़ बाकी है दिल तोड़ने का रिवाज़ बाकी है मौत के फ़रिश्तों ज़रा कुछ पल ठहरो मेरे आखरी नमा … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, अंदाज़, आखरी, कविता, का, गज़ल, जैन


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