Blogs about: Jeevan

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चलल कर ये बबुनी ओढ़नी संभाल के

ambuj wrote 2 months ago: कुछ दिन पहिले मनोज तिवारी के एगो गाना आइल रहे, “चलल कर ये बबुनी वोढ्नी संभाल के” ! मतलब … more →

Tags: गाँव, समाज, bhojpuri, जीवन, धर्म, लईका, लड़की, dharm, Gaon

तुमसे हूँ मैं और मुझसे हो तुम - ज़िंदगी 14 comments

mehhekk wrote 1 year ago: तुमसे हूँ मैं और मुझसे हो तुम वरना तो सब अधूरा  यही लफ्ज़ बार बार मूड कर हमसे ज़िंदगी कहेती है |  … more →

Tags: ज़िंदगी, Blogroll, dhun, Hindi Poem, Kavita, Life, Mehek, mehhekk, Mithi

चाह कर भी रूक नही सकता 13 comments

mehhekk wrote 1 year ago: चाह कर भी रूक नही सकता अमर वो वक़्त हूँ छाया मिले निज संसार मैं धूप खड़ा दरख़्त हूँ सब कुछ पाकर भी च … more →

Tags: Shayari, Kavita, Hindi Poem, Sher, Mehek, mehhekk, waqt, time, lamha

सबल,सजल,सरल6 comments

mehhekk wrote 1 year ago: सबल,सजल,सरल,सढल,सुगंधा,स्वस्तिका बेड़ियाँ को तोड़ कदमो ने ढूंढी है नयी दिशा | ममतामयी,कोमल हृदय,कनखर … more →

Tags: Kavita, Hindi Poem, Mehek, Nari, mehhekk, sabal, sajal, hariyali

तेरे वजूद का एहसास 11 comments

mehhekk wrote 1 year ago: अपने आप में खोई,अकेली ही खड़ी थी | न जाने किस सोच में डूबी थी |  लंबे घने गेसुओं को उसकी ,बहती हवा … more →

Tags: Mehek, mehhekk, pani, muskan, hindi, Blogroll, Zindagi, mukhmandal, barish

कठपुतली का खेल9 comments

mehhekk wrote 1 year ago: जनमानस सब जिंदा तो है पर मन की भावनाए मरी हुई बाहरी काया ही आकर्षित करती आत्मा दबी,जैसे कठपुतली सजी … more →

Tags: कठपुतली का खेल., Hindi Poem, kathputali, Kavita, Kaya, khel, Life, Mehek, mehhekk

ताश सी ज़िंदगी5 comments

mehhekk wrote 1 year ago: ताश सी ज़िंदगी //1// लगती है हमे कभी कभी ये ज़िंदगी ताश की गडडी सी इंसान सब ताश के पत्ते खेल खेलता व … more →

Tags: ताश की ज़िंदगी, Shayari, Kavita, Hindi Poem, Sher, Mehek, mehhekk, Blogroll, Zindagi

मुक्ति9 comments

mehhekk wrote 1 year ago: मुक्ति 1. भोर की लालिमा              मन में असीम भक्ति हाथों में पूजा थाल तुलसी की परिक्रमा मंत्रो … more →

Tags: मुक्ति, Shayari, Kavita, Hindi Poem, Bhakti, Sher, Mehek, aazadi, Nari

काग़ज़ पर उतर कर आ जाओ तुम 1 comment

mehhekk wrote 1 year ago: तुम्हे अपनी ज़िंदगी बनाना चाहते है मेरी सांसो में आकर मिल जाओ तुम | तुम्ही फूल मेरे जीवन की बगिया का … more →

Tags: काग़ज़ पर उतर कर, Shayari, Hindi Poem, PYAR, mohobaat, hum, Sher, Mehek, mehhekk

नये साल का नया पल3 comments

mehhekk wrote 1 year ago: ये जो पल है चला जाएगा एक पल में नया साल आएगा पल भर में जो बदल जाए उसको ही कहते जीवन | नये साल की नयी … more →

Tags: नये साल नया पल, Shayari, Kavita, Hindi Poem, Sher, Mehek, mehhekk, Blogroll, Zindagi

भूमध्य असीम से सागर में

mehhekk wrote 1 year ago: एक छोटिसी चट्टान पर खड़ी हूँ भूमध्य असीम से सागर में दूंढ़ रही हूँ किनारा ज़िंदगी में जो बन जाए सहार … more →

Tags: Kavita, Hindi Poem, Mehek, mehhekk, भूमध्य असीम से सागर म, sagar

माटी का घड़ा

mehhekk wrote 1 year ago: माटी का घड़ा मैं तो अब तलक़ सुखी सी माटी थी मैं धूल सी उड़कर आती जाती थी | मैं जिसके भी अंग लग जाती … more →

Tags: Shayari, Kavita, hidi poem, Sher, Mehek, mehhekk, Blogroll, माटी का घड़ा, Mitti

पाऊलवाटा 20 comments

mehhekk wrote 1 year ago:    आठवनिंच्या  झोक्यावर  आज घेतला मी विसावा  अजूनही शोधाते आहे प्रेमाचा तों हरवलेला ओल … more →

Tags: marathi kavita, , athvani, पाऊलवाटा, Blogroll, Kavita, Marathi, marathi bhasha, Marathi Blogs

satya3 comments

mehhekk wrote 1 year ago:   निकली हूँ आज,खोजने कुछ जवाब सुलझानी है कुछ उलझाने क्या बदली जा सकती है हाथों की लकीरें या वही होता … more →

Tags: satya, Shayari, Kavita, Hindi Poem, Sách, khoj


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