mehhekk wrote 4 months ago: लंबी सी रील के जैसी लगे मानसपटल के कैमेरे में क़ैद एक लम्हे का सफ़र ज़िंदगी | ====================== … more →
ambuj wrote 7 months ago: कुछ दिन पहिले मनोज तिवारी के एगो गाना आइल रहे, “चलल कर ये बबुनी वोढ्नी संभाल के” ! मतलब … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तुमसे हूँ मैं और मुझसे हो तुम वरना तो सब अधूरा यही लफ्ज़ बार बार मूड कर हमसे ज़िंदगी कहेती है | … more →
mehhekk wrote 1 year ago: चाह कर भी रूक नही सकता अमर वो वक़्त हूँ छाया मिले निज संसार मैं धूप खड़ा दरख़्त हूँ सब कुछ पाकर भी च … more →
mehhekk wrote 1 year ago: सबल,सजल,सरल,सढल,सुगंधा,स्वस्तिका बेड़ियाँ को तोड़ कदमो ने ढूंढी है नयी दिशा | ममतामयी,कोमल हृदय,कनखर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: अपने आप में खोई,अकेली ही खड़ी थी | न जाने किस सोच में डूबी थी | लंबे घने गेसुओं को उसकी ,बहती हवा भ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: जनमानस सब जिंदा तो है पर मन की भावनाए मरी हुई बाहरी काया ही आकर्षित करती आत्मा दबी,जैसे कठपुतली सजी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ताश सी ज़िंदगी //1// लगती है हमे कभी कभी ये ज़िंदगी ताश की गडडी सी इंसान सब ताश के पत्ते खेल खेलता व … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मुक्ति 1. भोर की लालिमा मन में असीम भक्ति हाथों में पूजा थाल तुलसी की परिक्रमा मंत्रो क … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तुम्हे अपनी ज़िंदगी बनाना चाहते है मेरी सांसो में आकर मिल जाओ तुम | तुम्ही फूल मेरे जीवन की बगिया का … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ये जो पल है चला जाएगा एक पल में नया साल आएगा पल भर में जो बदल जाए उसको ही कहते जीवन | नये साल की नयी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: एक छोटिसी चट्टान पर खड़ी हूँ भूमध्य असीम से सागर में दूंढ़ रही हूँ किनारा ज़िंदगी में जो बन जाए सहार … more →
mehhekk wrote 1 year ago: माटी का घड़ा मैं तो अब तलक़ सुखी सी माटी थी मैं धूल सी उड़कर आती जाती थी | मैं जिसके भी अंग लग जाती … more →
mehhekk wrote 1 year ago: आठवनिंच्या झोक्यावर आज घेतला मी विसावा अजूनही शोधाते आहे प्रेमाचा तों हरवलेला ओलावा आज मज पाशी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: निकली हूँ आज,खोजने कुछ जवाब सुलझानी है कुछ उलझाने क्या बदली जा सकती है हाथों की लकीरें या वही होता … more →