रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जाना के ख़िलाफ़ और अगर होश की पूछो तो मुझे होश नहीं अब तो तासीर-ए-ग़म-ए-इश्क़ यहां तक पहुंची के इधर होश अगर… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जान … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मुद्दत में वो फिर ताज़ा मुलाक़ात का आलम, ख़ामोश अदाओं में वो जज़्बात का आलम, अल्लाह रे वो शिद्दत-ए-जज़्बा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: इश्क की दास्तान है प्यारे, अपनी अपनी जुबान है प्यारे, हम जमाने से इन्तकाम तो ले, एक हसीं दरम्यान है … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है, जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है, आँखों में नमी सी है च … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ओस पड़े बहार पर आग लगे कनार में, तुम जो नहीं कनार में लुत्फ़ ही क्या बहार में, उस पे करे ख़ुदा रहम गर्द … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मुझे दे रहे हैं तसल्लियां वो हर एक ताज़ा पयाम से, कभी आके मंज़र-ए-आम पर कभी हट के मंज़र-ए-आम से, ना ग़रज़ … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: इश्क़ फ़ना का नाम है इश्क़ में ज़िंदगी न देख, जल्वा-ए-आफ़ताब बन ज़र्रे में रोशनी न देख, शौक़ को रहनुमा बन ज … more →