दुनिया की भीड़ में खुद को ढालना ज़रूरी होता है दो पल बैठ किनारे कभी खुद से मिलना ज़रूरी होता है | दर्द-ए-धूप में जिगर जलते हुए हसना ज़रूरी होता है जज़्बातों की बाढ़ बह जाए दिल से तब रोना ज… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: दुनिया की भीड़ में खुद को ढालना ज़रूरी होता है दो पल बैठ किनारे कभी खुद से मिलना ज़रूरी होता है … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ऐसी हर सहर कीजिए नींद खुले देखूं तुम्हे ऐसी हर सहर कीजिए दिल में छुपाए कुछ राज़ हमे खबर कीजिए | प … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तकदीर ने कुछ अनकहे फ़ैसले सुनाए कबुल कर उन्हे सराखों पर लिये है | ये दर्द छलक कही नासूर ना बन जाए … more →