ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा अलविदा ऐ सरज़मीन-ए-सुबह-ए-खन्दां अलविदा अलविदा ऐ किशवर-ए-शेर-ओ-शबिस्तां अलविदा अलविदा ऐ जलवागाहे हुस्न-ए-जानां अलविदा तेरे घर से एक ज़िन्दा लाश उठ जाने को है आ गले म… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा अलविदा ऐ सरज़मीन-ए-सुबह-ए-खन्दां अलविदा अलविदा ऐ किशवर-ए-शेर-ओ-श … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तुझ से रुख़सत की वो शाम-ए-अश्क़-अफ़्शां हाए हाए, वो उदासी वो फ़िज़ा-ए-गिरिया सामां हाए हाए, यां कफ़-ए-पा च … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: किस को आती है मसीहाई किसे आवाज़ दूं, बोल ऐ ख़ूंख़ार तनहाई किसे आवाज़ दूं, चुप रहूं तो हर नफ़स ड़सता है नाग … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: बोल इकतारे झन झन झन झन, काहकशां है मेरी सुंदन, शाम की सुर्ख़ी मेरा कुंदन, नूर का तड़का मेरी चिलमन, तोड़ … more →