जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं रोते हैं सब से … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 6 months ago: जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: एक ही रास्ता जब है दोनों का फिर क्यों द … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: पहली बार देखा तुमको जाने क्या हुआ दिल … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहा … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: किस राह को चल रहे थे किस राह को हम चल दि … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: दिल, मिलें कैसे कोई तो रास्ता दे क़ुछ यक़ … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ मैं सुबह-श … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: मैं कुछ कहता हूँ दिल कुछ कहता है मेरे ख … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिन … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: गिर जायेगा इस बरसात में घर तुम हो उधर ह … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अप … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: अजब जाला है डोरियों का एक डोर का छोर जा … more →