जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं अँधेरी राहों-सा दिल सूना हो जाता है जब आँखों में तेरा सपना टूट जाता है ख… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में ख़ुद … more →
विनय wrote 1 year ago: एक ही रास्ता जब है दोनों का फिर क्यों दोनों तन्हा फिर क्यों दोनों तन्हा मेरा मरहम है तू मेरा मज़हब है … more →
विनय wrote 1 year ago: पहली बार देखा तुमको जाने क्या हुआ दिल की धड़कनों का हल्का-हल्का एहसास हुआ डूब गया मैं तेरी आँखों में … more →
विनय wrote 1 year ago: कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ कहानियाँ कहती हों व … more →
विनय wrote 1 year ago: किस राह को चल रहे थे किस राह को हम चल दिये, उनसे प्यार लिए हम चले इक नये सफ़र पर, लुटा दिया सारा जो क … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल, मिलें कैसे कोई तो रास्ता दे क़ुछ यक़ीन ख़ुद पर रहे ऐसा ज़माने को वास्ता दे मैंने सपनों में सजायी ज … more →
विनय wrote 1 year ago: जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ मैं सुबह-शाम मंज़िल वह मेरी वह मेरा आख़िरी मुक़ाम वह रंगीन शाम थी शाम वह ग … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं कुछ कहता हूँ दिल कुछ कहता है मेरे ख़ाबों में न जाने कौन रहता है आया नहीं कभी वह यहाँ पर फिर भी म … more →
विनय wrote 1 year ago: ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं हाथों … more →
विनय wrote 1 year ago: गिर जायेगा इस बरसात में घर तुम हो उधर हम हैं इधर जंगल ही जंगल है सब वीराना-सा जिस सिम्त दौड़ती है नज़ … more →
विनय wrote 1 year ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अपनी दुआ में असर ढूँढ़ते हैं तुम देखकर हँसते हो मुझे और हम तेर … more →
विनय wrote 1 year ago: अजब जाला है डोरियों का एक डोर का छोर जाने और कितनी डोरियों से जुड़ा है… डोरियाँ कुछ मानूस जानी … more →