छोटी बहर में एक प्रयोग करने की गुस्ताख़ी की है आपकी अमूल्य टिप्पणी का मुंतज़िर हूँ…. =================== आपकी याद आई चाँदनी मुस्कुराई कहीं पर जला दिल मोहब्बत थरथराई हवा ये शोख़ पुरनम तेरी खुशबू ले … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: छोटी बहर में एक प्रयोग करने की गुस्ताख़ी की है आपकी अमूल्य टिप्पणी का मुंतज़िर हूँ…. =========== … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी लम्हों में सिमट जायेगी ऱूह टुकड़ों में जो बँट जायेगी आज फ़िर तन्हाई साथ लायी उन्हे आज फ़िर नींद … more →