तर्क़ेवफ़ा का दिल पे असर है रात कटी तो सहर का ड़र है बड़े शौक़ से फूँक चले हो सोच तो लेते किसी का घर है जान भी आपके नाम लुटा दी प्यार की कोई और कसर है आज ज़माना मुझसे ख़फ़ा है ये सेहरा भी आपके सर है इ… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 4 months ago: तर्क़ेवफ़ा का दिल पे असर है रात कटी तो सहर का ड़र है बड़े शौक़ से फूँक चले हो सोच तो लेते किसी का घर … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: हो तेरी इनायत तो मोहब्बत निभा सकूँ दो फूल तेरी ज़ुल्फ़ में मै भी सजा सकूँ कैसा तेरा जादू है के तेरे … more →
Rohit Jain wrote 5 months ago: कोई होता नहीं है जान, जान कहने से ज़मीं ज़मीं ही रही आसमान कहने से झुलस तो अब भी रहा है मेरा ये जिस्म … more →
Rohit Jain wrote 5 months ago: ऐसा भी मोड़ आएगा सोचा नहीं था दोस्त तू भी मुझे रुलाएगा सोचा नहीं था दोस्त रक्खेगा तू ख़याल जो दिल दे द … more →