मोहोब्बतें आँखों से आँखों का फलसफा कहती खामोशियों में भी मदहोश सी बहती मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे दिल में रहती क्यों बदलासा लगता है फ़िज़ायों का वही मौसम क्यों अपनासा महसूस होता है पराया मन खुद से भी… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: मोहोब्बतें आँखों से आँखों का फलसफा कहती खामोशियों में भी मदहोश सी बहती मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे द … more →