कब से हूँ क्या बताऊं जहान-ए-ख़राब में, शब हाय हिज्र को भी रखूं गर हिसाब में, ता फिर ना इंतज़ार में नींद आये उम्र भर, आने का अहद कर गये आये जो ख़्वाब में, क़ासिद के आते आते ख़त इक और लिख रखूं, मै जानता हूँ … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: कब से हूँ क्या बताऊं जहान-ए-ख़राब में, शब हाय हिज्र को भी रखूं गर हिसाब में, ता फिर ना इंतज़ार में नीं … more →