आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि अपने मूंह से कभी आत्मप्रवंचना और दूसरे की निंदा न करें। क्योंकि कभी आचरण की ऊंचाई पर ह… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते हैं ————————– देख … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय संत शिरोमणि कबीरदास … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कबीर सपनें रैन के, ऊपरी आये नैन जीव परा बहू लूट में, जागूं लेन न देन संत शिरोमणि कबीरदास जी का आशय य … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: प्रीति कर सुख लेने को सुख गया हिराय जैसे पाइ छछुंदरी, पकडि सींप पछिताय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: चतुराई हरि ना मिलै, ए बातां की बात एक निस प्रेमी निराधार का गाहक गोपीनाथ संत कबीरदास जी का आशय यह है … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: पीर सबन की एकसी, मूरख जाने नांहि अपना गला कटाक्ष के , भिस्त बसै क्यौं नांहि संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: दुखिया भूखा दुख कीं, सुखिया सुख कौं झूरि सदा अजंदी राम के, जिनि सुख-दुख गेल्हे दूरि संत शिरोमणि कबीर … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: माला फेरै कह भयो, हिंरदा गाठि न खोय। गुरु चरनन चित राखिये, तो अमरापुर जोय।। माला तो कर में फिरै, जीभ … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: यह तत वह तत एक है, एक प्रान दुइ गात अपने जिय से जानिये, मेरे जिय की बात संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: संत कबीरदास जी का कहना है ——————— गाहक मिलै तो कुछ कहूं, न … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: मन के मते न चालिये, मन के मते अनेक जो मन पर असवार है,सौ साधु कोय एक संत कबीर कहते हैं कि मन के अनुसा … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि ———————— तारा मण् … more →