भारतीय अध्यात्मिक ज्ञान एक तरह से स्वर्णिम शब्द रहस्यों से भरा एक समूह है बस इसका एक ही दोष है कि आपको शब्दों के अर्थ के साथ उनका भाव भी ग्रहण करना पड़ता है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली ने हमारे समाज की चिंत… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय संत शिरोमणि कबीरदास … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: कबीर तो सांचै मतै, सहै जू सनमुख वार कायर अनी चुभाय के, पीछे झखै अपार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: जौ मन लागै एक सों, तो निरुवारा जाय तूरा दो मुख बाजता, घना तमाचा खाय संत श्री कबीरदास जी कहते हैं अगर … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: अष्ट सिद्धि नव निधि लौं, सबही मोह की खान त्याग मोह की वासना, कहैं कबीर सुजान संत श्री कबीरदास का कथन … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: देश के बुद्धिजीवियों का एक गोलमेज सम्मेलन बुलाया गया था। गोलमेज सम्मेलन का विषय था कि ‘जूता बड़ा कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आस आस घर घर फिरै, सहै दुखारी चोट कहैं कबीर भरमत फिरै,ज्यों चैसर की गोट संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हीरा तहां न खोलिए,जहां खोटी है हाट कसि करि बांधो गठरी, उठि चालो बाट संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जोरे बड़ मति नांहि जैसे फूल उजाड़ को, मिथ्या हो झड़ जांहि संत शिरोमणि कबीरदास … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हरि गुन गावे हरषि के, हिरदय कपट न जाय आपन तो समुझै नहीं, औरहि ज्ञान सुनाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंसाशून्यमयत्नलभ्यमश्यनं धात्रा मरुत्कल्पितं व्यालानां पशवस्तृणांकुरभुजस्तुष्टाः स्थलीशायिनः संसारा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पढ़ै गुनै सीखै सुनै, मिटी न संसे सूल कहैं कबीर कासों कहूं, ये ही दुख का मूल संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दीपक सुन्दर देखि करि, जरि जरि मरे पतंग बड़ी लहर जो विषय की, जरत न मोरे अंग संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: श्रम ही ते सब होत है, जो मन सखी धीर श्रम ते खोदत कूप ज्यों, थल में प्रगटै नीर संत शिरोमणि कबीरदास जी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जंत्र मंत्र झूठ है, मति भरमो जग कोय सार शब्द जानै बिना, कागा हंस न होय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शब्द कहै सौ कीजिये, बहुतक गुरु लबार अपने अपने लाभ को, ठौर ठौर बटपार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे इस ब्लाग/पत्रिका पर संत शिरोमणि कबीरदास के दोहों वाला एक पाठ आज एक हजार की पाठक संख्या पार गया। … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तरुवर जड़ से काटिया, जबै तम्हारो जहाज तारे पर बोरे नहीं, बांह गाहे की लाज संत कबीर दास जी कहते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुंजी मुख से कन गिरा, खुटै न वाको आहार कौड़ी कन लेकर चली, पोषन दे परिवार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: (यह इस ब्लाग/पत्रिका की सौवीं पोस्ट है) सहकामी तू घट में करै, घट ही में करतार घट ही भीतर पाइये, सुरत … more →