गुलाबी चूड़ीयां घर से जब भी शमा के पैर बेवजह बाहर निकलते , सीधा पास स्थित समंदर के किनारे पर ही रुकते | भीगी रेत पर कदमों को छूते हुए पानी में घंटों खड़ी हो जाती | मन का उल्हास हो या गम का एहसास सब उस… more →
mehekkashyap omprakash wrote 4 months ago: ईश्वर बदल चुका है. अब वह अपनी चिंता पहले से ज्यादा करता है. भक्त का मन देखने, उसकी भावना को सम्मान द … more →
kashyap omprakash wrote 4 months ago: एक घर के बाहर मेहमानों की भीड़ और भीतर से आती पकवानों की मनभावन गंध से कुत्ते ने अनुमान लगा लिया कि … more →