इज़्न-ए-खिराम लेते हुये आसमां से हम, हटकर चले हैं रहगुज़र-ए-कारवां से हम, क्योंकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे क्या कहें, वो राज़-ए-दिल जो कह न सके राज़दां से हम, हमदम यही है रहगुज़र-ए-यार-ए-खुश-खिराम, गुज़रे हैं ला… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: इज़्न-ए-खिराम लेते हुये आसमां से हम, हटकर चले हैं रहगुज़र-ए-कारवां से हम, क्योंकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे … more →