इज़्न-ए-खिराम लेते हुये आसमां से हम, हटकर चले हैं रहगुज़र-ए-कारवां से हम, क्योंकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे क्या कहें, वो राज़-ए-दिल जो कह न सके राज़दां से हम, हमदम यही है रहगुज़र-ए-यार-ए-खुश-खिराम, गुज़रे हैं ला… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: इज़्न-ए-खिराम लेते हुये आसमां से हम, हटकर चले हैं रहगुज़र-ए-कारवां से हम, क्योंकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है, हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है, बाहज़ारां इज़्तिराब-ओ-सदहज़ … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है बाहज़ारां इज़्तिराब-ओ-सदहज़ार … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तुझ से रुख़सत की वो शाम-ए-अश्क़-अफ़्शां हाए हाए, वो उदासी वो फ़िज़ा-ए-गिरिया सामां हाए हाए, यां कफ़-ए-पा च … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तोड़कर अहद-ए-करम नाआशना हो जाइये, बंदापरवर जाइये अच्छा ख़फ़ा हो जाइये, राह में मिलिये कभी मुझ से तो अज़र … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रोशन जमाल-ए-यार से है अन्जुमन तमाम, दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम, हैरत ग़ुरूर-ए-हुस्न से शोखी स … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: नज़र वो है के जो कौन-ओ-मकां के पार हो जाये, मगर जब रू-ए-ताबां पर पड़े बेकार हो जाये, नज़र उस हुस्न पर ठ … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मुद्दत में वो फिर ताज़ा मुलाक़ात का आलम, ख़ामोश अदाओं में वो जज़्बात का आलम, अल्लाह रे वो शिद्दत-ए-जज़्बा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: किस को आती है मसीहाई किसे आवाज़ दूं, बोल ऐ ख़ूंख़ार तनहाई किसे आवाज़ दूं, चुप रहूं तो हर नफ़स ड़सता है नाग … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: बोल इकतारे झन झन झन झन, काहकशां है मेरी सुंदन, शाम की सुर्ख़ी मेरा कुंदन, नूर का तड़का मेरी चिलमन, तोड़ … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ऐ वतन मेरे वतन रूह-ए-रवानी-ए-एहराब, ऐ के ज़र्रों में तेरे बू-ए-चमन रंग-ए-बहार, रेज़े अल्मास के तेरे खस … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब तो उठ सकता नहीं आंखों से बार-ए-इन्तज़ार, किस तरह काटे कोई लैल-ओ-नहार-ए-इन्तज़ार, उन की उल्फ़त का यक़ी … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई वो सई-ए-क़रम फ़रमा भी गये, उस सई-ए-क़रम का क्या कहिये बहला भी गये तड़पा भी गये … more →