Blogs about: Kahkashan

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हमदम यही है1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: इज़्न-ए-खिराम लेते हुये आसमां से हम, हटकर चले हैं रहगुज़र-ए-कारवां से हम, क्योंकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Chitra Singh, Ghazal, Jagjit Singh, Kahkashan 2, Non Films, कहकशां

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है11 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है, हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है, बाहज़ारां इज़्तिराब-ओ-सदहज़ … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Non Films, Chitra Singh, जगजीत सिंह, Hmv

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है 2 comments

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है बाहज़ारां इज़्तिराब-ओ-सदहज़ार … more →

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तुझ से रुख़सत की वो1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तुझ से रुख़सत की वो शाम-ए-अश्क़-अफ़्शां हाए हाए, वो उदासी वो फ़िज़ा-ए-गिरिया सामां हाए हाए, यां कफ़-ए-पा च … more →

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तोड़कर अहद-ए-करम नाआशना हो जाइये,

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तोड़कर अहद-ए-करम नाआशना हो जाइये, बंदापरवर जाइये अच्छा ख़फ़ा हो जाइये, राह में मिलिये कभी मुझ से तो अज़र … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Chitra Singh, Ghazal, Jagjit Singh, Non Films, अहद-ए-करम, कहकशां

रोशन जमाल-ए-यार से है

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रोशन जमाल-ए-यार से है अन्जुमन तमाम, दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम, हैरत ग़ुरूर-ए-हुस्न से शोखी स … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Chitra Singh, Jagjit Singh, Non Films, कहकशां, चित्रा सिंह, जगजीत सिंह

नज़र वो है के1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: नज़र वो है के जो कौन-ओ-मकां के पार हो जाये, मगर जब रू-ए-ताबां पर पड़े बेकार हो जाये, नज़र उस हुस्न पर ठ … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Non Films, Chitra Singh, Asghar Gondavi, कहकशां

मुद्दत में वो फिर

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मुद्दत में वो फिर ताज़ा मुलाक़ात का आलम, ख़ामोश अदाओं में वो जज़्बात का आलम, अल्लाह रे वो शिद्दत-ए-जज़्बा … more →

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किस को आती है मसीहाई

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: किस को आती है मसीहाई किसे आवाज़ दूं, बोल ऐ ख़ूंख़ार तनहाई किसे आवाज़ दूं, चुप रहूं तो हर नफ़स ड़सता है नाग … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Chitra Singh, Ghazal, Jagjit Singh, Non Films, कहकशां, चित्रा सिंह

बोल इकतारे झन झन

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: बोल इकतारे झन झन झन झन, काहकशां है मेरी सुंदन, शाम की सुर्ख़ी मेरा कुंदन, नूर का तड़का मेरी चिलमन, तोड़ … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Chitra Singh, Ghazal, Jagjit Singh, Non Films, कहकशां, चित्रा सिंह

ऐ वतन मेरे वतन

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ऐ वतन मेरे वतन रूह-ए-रवानी-ए-एहराब, ऐ के ज़र्रों में तेरे बू-ए-चमन रंग-ए-बहार, रेज़े अल्मास के तेरे खस … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Chitra Singh, Ghazal, Jagjit Singh, Non Films, Ae Watan Mere Watan, कहकशां

अब तो उठ सकता नहीं

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब तो उठ सकता नहीं आंखों से बार-ए-इन्तज़ार, किस तरह काटे कोई लैल-ओ-नहार-ए-इन्तज़ार, उन की उल्फ़त का यक़ी … more →

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तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई वो सई-ए-क़रम फ़रमा भी गये, उस सई-ए-क़रम का क्या कहिये बहला भी गये तड़पा भी गये … more →

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