मुक्ति 1. भोर की लालिमा मन में असीम भक्ति हाथों में पूजा थाल तुलसी की परिक्रमा मंत्रो का उच्चारण जाप शन्खो का नीनाद भजन स्तुति गाउ प्रभु में विलीन हो जाउ मुक्ति चिन्ताओ से | 2. नारी हूँ… more →
mehhekk wrote 1 year ago: मुक्ति 1. भोर की लालिमा मन में असीम भक्ति हाथों में पूजा थाल तुलसी की परिक्रमा मंत्रो … more →
Tags: मुक्ति, Shayari, Kavita, Hindi Poem, Jeevan, Bhakti, Sher, Mehek, aazadi
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