एक तलाश पूरी होते ही आदमी दूसरी में जुट जाता अंतहीन सिलसिला है अपने मकसद रोज नये बनाता पूरे होते ही दूसरे में जुट जाता भरता जाता अपना घर पर कीमती समय का जो मिला है खजाना नहीं देखता उसकी तरफ जो हर पल ल… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक तलाश पूरी होते ही आदमी दूसरी में जुट जाता अंतहीन सिलसिला है अपने मकसद रोज नये बनाता पूरे होते ही … more →