हाथों में उठाए काग़ज़ और क़लम लिख देते है दिल के जज़्बातों को खुद के ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के ,कभी कच्चे से लगते है | कल्पनाओ को मन के नया रूप मिलता जी लेते है अपने उन सिमटे ख्वाबों को भावनाओ में ब… more →
mehekAshok wrote 1 year ago: कलम! जिस से मैं आज बरसों से अपने दिल की आवाज़ को लफ्जों मैं ढालता रहा हूँ , बहते हर आंसू को पोछता … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाथों में उठाए काग़ज़ और क़लम लिख देते है दिल के जज़्बातों को खुद के ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के ,कभ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: और कुछ भी नही दर्पण में अपनी छवि देख रहे थे देखा तेरा अक्स,और कुछ भी नही | जमाने के फसाने सुनने चाह … more →