कोई उम्मीद बर नहीं आती, कोई सूरत नज़र नहीं आती, मरते हैं आरजू में मरने की, मौत आती है पर नहीं आती, मौत का एक दिन मुआईं है, नींद क्यों रात भर नहीं आती? हम वहाँ हैं जहाँ से हमको भी, कुछ हमारी ख़बर नहीं आ… more →
Hum sabki duniya's Weblogkapilkiduniya wrote 1 year ago: कोई उम्मीद बर नहीं आती, कोई सूरत नज़र नहीं आती, मरते हैं आरजू में मरने की, मौत आती है पर नहीं आती, मौ … more →
kapilkiduniya wrote 1 year ago: ज़माने के जिस दौर से इस वक्त हम गुज़र रहे हैं, अगर आप उससे नावाकिफ हैं तो मेरे अफ़साने पढिये. और अगर … more →