संसार के दुःख रूपी विष से हर किसी को है आघात यहाँ, इस विषरूपी दुःख दैत्य की क्या कोई नहीं है काट यहाँ ? क्या कुछ भी नहीं है ऐसा जो हर किसी को खुशियाँ दे पाए ? एक पल के लिए तो कम से कम हर बात भुल… more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: संसार के दुःख रूपी विष से हर किसी को है आघात यहाँ, इस विषरूपी दुःख दैत्य की क्या कोई नहीं है क … more →
Tags: Kavita, Shubhashish, कला, शेर, कविता, शुभाशीष, मुक्तक, ख़ुशी, KHUSHI
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