1.आए है हम भी इस मोड़ पर अपनी महक कुछ छोड़ जाए इन ख्वाहिशो के कारवाँ में कही हमारा भी नाम आए | 2.हम अकेले ही चल रहे थे ज़िंदगी की राहे-ए-गुजर कारवाँ कब अपना हुआ,न जानू और को… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: 1.आए है हम भी इस मोड़ पर अपनी महक कुछ छोड़ जाए इन ख्वाहिशो के कारवाँ में कही हमारा भी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मन के झरोके से झाकती और उठती ख्वाहिशो की छोटी लहरें हर दिन नया जनम लेकर आती है देखती है ख्वाब संपू … more →