वक़्त की रफ़्तार वक़्त अपनी रफ़्तार में मुझे भी ढलने दो मैं भी एक जर्रा हूँ तेरे लम्हे से गिरा हुआ | कितनी जल्दी है तुझे,कहाँ पहुँचना है बताओ तुम्हे भाग भाग कर पकड़ना नही होता मुझ से रुक जा कही… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: वक़्त की रफ़्तार वक़्त अपनी रफ़्तार में मुझे भी ढलने दो मैं भी एक जर्रा हूँ तेरे लम्हे से गिरा हुआ … more →