कौन हो नूरे-जिगर कोई मोह्पाश हो दहकते दिल में खिला प्यार पलाश हो | खीची चली आती हूँ उसी मकाम पर मुश्किल से मिलती वो बूँद आस हो | शाहे-समंदर कब का रीता हो चुका बुझती ही नही कभी अजीब प्यास हो | तु… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: कौन हो नूरे-जिगर कोई मोह्पाश हो दहकते दिल में खिला प्यार पलाश हो | खीची चली आती हूँ उसी मकाम पर म … more →