आओ ! सब मिलकर अपनी जननी के पुनः चरण स्पर्श करें और प्रभू से विनती करें कि हे !परम पिता हमे हर जन्म मे इसी माँ कि कोख से पैदा करना ..हमारा जीवन इसी गोद मे सार्थक हैं. हमारा बचपन इसी ममता का प्यासा हैं … more →
GEET,GHAZAL,KAVITA AUR NAZM BY KAVI DEEPAK SHARMAkavideepaksharma wrote 7 months ago: आओ ! सब मिलकर अपनी जननी के पुनः चरण स्पर्श करें और प्रभू से विनती करें कि हे !परम पिता हमे हर जन्म म … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: गगन को चूमते ऊंचे मकान वालों सुनो बहुत दिलकश , मुन्नकश ऐवान वालों सुनो तुम्हें क्यों अपनी इमारत पे ग … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: दिल में जब तक मैं-तू नहीं हम हैं घर बिखरने के मौके बहुत कम हैं . कौन खींचेगा भला सेहन में दीवार प्या … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: जिस पर मुझे ज़रूरत से ज्यादा गुमान था दिल उस शख्स का बहुत बेईमान था बिखरा हुआ पड़ा था एक साया उसके प … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: एक साठ वर्षीय नेत्रहीन व्यक्ति, जो शायद रास्ता भूल गया था, एक सुनसान सड़क पर अकेला चला जा रहा था । रा … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: जब भी कोई बात डंके पे कही जाती है न जाने क्यों ज़माने को अख़र जाती है । झूठ कहते हैं तो मुज़रिम करार … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: Daal kar kuch neer ki bunde adhar mein Kar akela hi vida agyat safar mein Kuch neh mishrit ashru ke … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: मैं बिखर रहा हूँ मेरे दोस्त संभालो मुझको , मोतिओं से कहीं सागर की रेत न बन जाऊँ कहीं यह ज़माना न उडा … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: जो रोज़ चलती रही जि़स्म पर गोलियाँ और मनती रही खून की होलियाँ तो एक दिन हकीकत हम भूल जायेंगे हो … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: मेरे जेहन में कई बार ये ख्याल आया की ख्वाब के रंग से तेरी सूरत संवारूँ इश्क में पुरा डुबो दूँ तेरा ह … more →