गगन को चूमते ऊंचे मकान वालों सुनो बहुत दिलकश , मुन्नकश ऐवान वालों सुनो तुम्हें क्यों अपनी इमारत पे गुरुर है इसका असली मालिक तो केवल मजदूर है इनकी हकदार रोते बच्चों की निगाहें है इनकी हक़दार पत्थर तोड़… more →
GEET,GHAZAL,KAVITA AUR NAZM BY KAVI DEEPAK SHARMAkavideepaksharma wrote 7 months ago: गगन को चूमते ऊंचे मकान वालों सुनो बहुत दिलकश , मुन्नकश ऐवान वालों सुनो तुम्हें क्यों अपनी इमारत पे ग … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: मेरी सांसों में यही दहशत समाई रहती है मज़हब से कौमें बँटी तो वतन का क्या होगा। यूँ ही खिंचती रही दीव … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: जब भी कोई बात डंके पे कही जाती है न जाने क्यों ज़माने को अख़र जाती है । झूठ कहते हैं तो मुज़रिम करार … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: मेरे जेहन में कई बार ये ख्याल आया की ख्वाब के रंग से तेरी सूरत संवारूँ इश्क में पुरा डुबो दूँ तेरा ह … more →
kavideepaksharma wrote 1 year ago: महज़ अलफाज़ से खिलवाड़ नहीं है कविता कोई पेशा ,कोई व्यवसाय नही है कविता । कविता शौक से भी लिखन … more →
pryas wrote 1 year ago: तुम भूल जाओ या याद रखो, कोई आयेगा इसकी आस रखो. धूप में पिघल जायेंगे सपने, जुल्फों की छाँव पास रखो. ह … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हर कवि की कविता हर कवि की कविता अनमोल होती है कोहिनूर से भी ना उसका कोई तोल है | कविता कवि के हृ … more →