गगन को चूमते ऊंचे मकान वालों सुनो बहुत दिलकश , मुन्नकश ऐवान वालों सुनो तुम्हें क्यों अपनी इमारत पे गुरुर है इसका असली मालिक तो केवल मजदूर है इनकी हकदार रोते बच्चों की निगाहें है इनकी हक़दार पत्थर तोड़… more →
GEET,GHAZAL,KAVITA AUR NAZM BY KAVI DEEPAK SHARMAkavideepaksharma wrote 7 months ago: गगन को चूमते ऊंचे मकान वालों सुनो बहुत दिलकश , मुन्नकश ऐवान वालों सुनो तुम्हें क्यों अपनी इमारत पे ग … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: दिल में जब तक मैं-तू नहीं हम हैं घर बिखरने के मौके बहुत कम हैं . कौन खींचेगा भला सेहन में दीवार प्या … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: जिस पर मुझे ज़रूरत से ज्यादा गुमान था दिल उस शख्स का बहुत बेईमान था बिखरा हुआ पड़ा था एक साया उसके प … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: एक साठ वर्षीय नेत्रहीन व्यक्ति, जो शायद रास्ता भूल गया था, एक सुनसान सड़क पर अकेला चला जा रहा था । रा … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: Daal kar kuch neer ki bunde adhar mein Kar akela hi vida agyat safar mein Kuch neh mishrit ashru ke … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: मैं बिखर रहा हूँ मेरे दोस्त संभालो मुझको , मोतिओं से कहीं सागर की रेत न बन जाऊँ कहीं यह ज़माना न उडा … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: जो रोज़ चलती रही जि़स्म पर गोलियाँ और मनती रही खून की होलियाँ तो एक दिन हकीकत हम भूल जायेंगे हो … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: मेरे जेहन में कई बार ये ख्याल आया की ख्वाब के रंग से तेरी सूरत संवारूँ इश्क में पुरा डुबो दूँ तेरा ह … more →