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Blogs about: Kavita

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रब्बा भले मैं क्यों ना सोती ही मर जाउँ |8 comments

mehhekk wrote 13 hours ago: रात प्रहर खुद को गहरी नींद में पाया सपनो में हमसे मिलने साजन आया | वक़्त का लम्हा था कुछ रुका रुका स … more →

सुबह का कोहरा 17 comments

mehhekk wrote 2 weeks ago: खोल दो अपनी पंखुड़ियों को  हौले हौले एक के बाद एक  फैलाओ अपनी बाहें इतनी  सारी कायनात भर लो  आशाओं क … more →

Tags: AASHA, kohra, subah

नायकत्व का आकर्षण-हिन्दी क्षणिका

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: गड़े मुर्दे उखड़ कर भी इसलिये ताजा हो जाते हैं। क्योंकि जिसे मुद्दे पर चला चर्चा का दौर एक बार फिर वह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, शायरी, शेर, अनुभूति, क्षणिका, शब्द, दीपकबापू, दीपक भारतदीप, कला

अन्त कायर का / भवानीप्रसाद मिश्र5 comments

अफ़लातून wrote 3 weeks ago: अन्त कायर का कायरों को वार नहीं झेलने पड़ते और इसलिए घाव न उनकी छाती पर होते हैं न पीठ पर उनका खून बा … more →

Tags: भवानीप्रसाद मिश्र bhava, Hindi Poem, ant, अन्त, अन्त कायर का, कविता, कायर, भवानीप्रसाद, मिश्र

नज़दीकियाँ 16 comments

mehhekk wrote 3 weeks ago:         जब मैं उदास होती हूँ  मन में ही सिसकती रोती हूँ  बिन कारण ही,ऐसे ही  भाव … more →

Tags: nazdikiyan

दो कविताएं / जनम दिन / अफ़लातून10 comments

अफ़लातून wrote 3 weeks ago: जनम दिन १. जीर्ण कपड़ा उतार कर नया पहनना पुनर्जीवन है - मेरे गले यह बात अब तक नहीं उतरी | कुशन पर धु … more →

Tags: Hindi Poem, अफलातून, अफ़लातून, कविता, जनम दिन, जन्म दिवस, जन्मदिन, वर्ष गांठ, वासांसिजीर्णानि

पैसे से गाडी खरीदी है रास्ता नहीं-व्यंग्य चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक न … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, Deepak bapu

शब्द वही हो तो भी : राजेन्द्र राजन1 comment

अफ़लातून wrote 1 month ago: चिराग़ की तरह पवित्र और जरूरी शब्दों को अंधेरे घरों तक ले जाने के लिए हम आततायियों से लड़ते रहे थके-हा … more →

Tags: Literature, rajendra rajan, shabd, राजेन्द्र राजन, शब्द, शब्द वही हों तो भी

कश्मीर1 comment

प्रवीण wrote 1 month ago: स्वर्ग को चूम, खुशीओं की हवायें बिखर गई, अनजान अनदेखी दिशाओं में, जब जब घाटी में जली बर्फ़, सपनों को … more →

Tags: कविता, हिंदी कविता, कविता ब्लॉग, हिंदी ब्लॉग, कश्मीर, Hindi Poem, Hindi Kavtia, घाटी, स्वर्ग

मासूम लम्हे30 comments

mehhekk wrote 1 month ago: दिल के आँगन में यूही कभी कभी खेलते नज़र आते है हुल्लड़ मचाते खुद ही रूठते खुद को ही मनाते झगड़ते,जीत … more →

मेरे दिन रात 1 comment

प्रवीण wrote 1 month ago: दिन, दिन तू ये कहने को है ! रात, रात तू ये कहने को है! हमारी रात तू तब होती है, जब आपकी जुल्फ़ की चि … more →

Tags: कविता, हिंदी कविता, कविता ब्लॉग, हिंदी ब्लॉग, दिन, रात, Hindi Poem, Hindi Kavtia

ख्वाबों का आशियाँ 21 comments

mehhekk wrote 1 month ago:         नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ हमारी मोहोब्बत से सज़ा  ख्वाबों का आशियाँ  सूबह की सुनहर … more →

Tags: mohobbat

पागल दिल था10 comments

hemjyotsana "Deep" wrote 2 months ago: कल तुम गुजर रहे थे , या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था …. कल आहट थी कोई पहचानी , या कोई दरवाजे पर आ … more →

Tags: दोस्ती, Blogroll, Deep, hemjyotsana, hindi, Life, Poems, Shayeri, कविता

तुम याद आई इतना1 comment

प्रवीण wrote 2 months ago: जिंदिगी का हर पल , सदियों में बदल गया, तुम याद आई इतना ! एक बूंद की प्यास में, मैं सागर पी गया, तुम … more →

Tags: कविता, हिंदी कविता, कविता ब्लॉग, हिंदी ब्लॉग, याद, जिंदिगी, सागर, Hindi Poem, Hindi Kavtia

तुमसे मांगती मैं अपनी जिंदगी2 comments

कल्पना भारती wrote 2 months ago: सुबह से लेकर शाम है लवों पे तेरा ही नाम है भरता है दिल तेरे लिए आंहें कोमल मन में सिर्फ तेरी यादें क … more →

Tags: Hindi Poems, Kalpana the Imagination

कुँवरनारायण को ज्ञानपीठ मिलने की खुशी में उनकी चार कवितायें5 comments

अफ़लातून wrote 2 months ago: जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी … more →

Tags: Literature, hindi, Kunwar Narayan, communalism, हिन्दी कविता, Hindi Poems, कविता, gyanpeeth, कुँवरनारायण

बिखर चुका है गरीबों का शिराजा बापू : सलीम शिवालवी2 comments

अफ़लातून wrote 2 months ago: [गांधी जयन्ती को बीते कल दो ही दिन हुए थे । सलीम मिले तो चार पंक्तियां सुनाईं । मैंने कहा लिख दीजिए … more →

Tags: Ghazal, Gandhi, कविता, गांधी, सलीम, सलीम शिवालवी, बापू

कभी अच्छा,कभी बुरा-हिंदी शायरी (sum good sum bed-hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: एक दिन घूमते हुए उसने चाय पिलाई तब वह अच्छा लगा कुछ दिन बाद वह मिला तो उसने पैसे उधार मांगे तब वह बु … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, अनुभूति, सृजन, bharat, E-patrika, दीपकबापू, दीपक भारतदीप, Deepak bharatdeep

किसी को रात डराती,किसी को दिन-हिन्दी शायरी (din aur raat-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हमने देखा था उगता सूरज उन्होने देखा डूबता हुआ वह कर रहे थे चंद्रमा की रौशनी में जश्न मनाने की तैयारी … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका


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