अपने जब दूर जाते है तो बहुत दर्द देते है पर अपने जब पास रह कर भी दूरिया बना लेते है तो दिल में एक कसक छोड़ जाते हैै … more →
कुछ िदल सेदरभंगिया wrote 3 days ago: कितना अच्छा होगा जब एक ही किताब पढ़ायी जायेगी दिल्ली से सुदूर गाँव तक. बिजली का क्या है दिल्ली में भी … more →
दरभंगिया wrote 4 days ago: लगे आपको “अप्रतिम” वह शब्द कहाँ से लाऊँ मैं. स्वरचित अज्ञान शिविर में जब तड़प रहा हूँ हर … more →
दरभंगिया wrote 1 week ago: एक लड़की पर तेज़ाब डाला गया. दूसरी जींस पहन कर घूम रही थी. तीसरी ने अपनी माँ की हत्या कर दी. चौथी को स … more →
दरभंगिया wrote 1 week ago: कुछ दिनों से सोच रहा था क्या क्या नहीं किया कितने सालों से. कि हल्के से यह दिल भींचा आंख मली कि समझ … more →
ambuj wrote 2 weeks ago: खुबसूरत थे वोह पल जब तुम साथ थे मासूम थे वोह पल जब तुम साथ थे नाज़ था हमे खुद पे जब तुम साथ थे जलते … more →
अफ़लातून wrote 2 weeks ago: [ अब की गरमियों में पहला पड़ाव हैदराबाद था । जहाँ एक जानदार व्यक्ति - लाल्टू से मुलाकात हुई । उनकी कव … more →
दरभंगिया wrote 2 weeks ago: बेकार की लफ्फाजी ही करनी है ना! तो कर देंगे. और बन जायेगी एक कविता. बिन अर्थ, बेकार. ऐसा नहीं है. हर … more →
दरभंगिया wrote 3 weeks ago: तेरा हाथ मेरा हाथ मेरे तुम तेरे हम मैं और तू तू ही तू स्याह रात तेरा साथ तेरे आस मेरे सांस घर द् … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 3 weeks ago: रंग महौब्बत का है ताउम्र चमकता रहता है । इस नगरी में जादु है गुलाल बरसता रहता है । क्या तुम से म … more →
mequitnever wrote 3 weeks ago: आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: क्यों डरे हो काफिला लुट गया फिर बनेगा। यह तूफान उड़ा ले गया तंबू फिर तनेगा। हार या जीत का चक्र चलता ह … more →
दरभंगिया wrote 1 month ago: आज कल मैं बोर हूँ. मतलब? कंफ्यूज्ड, निरर्थक और अकर्मण्य भी हूँ. यही बात कोई और मुझे कहे तो? शायद एक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नजरें फेरकर वह चले जाते हैं। देखने में लगते हैं हमसे बेपरवाह पर हकीकत यह है कि हमारी आंखों में उनको … more →
kavideepaksharma wrote 1 month ago: आओ ! सब मिलकर अपनी जननी के पुनः चरण स्पर्श करें और प्रभू से विनती करें कि हे !परम पिता हमे हर जन्म म … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →