दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां ,दाग तो था , पर, वो उसकी खूबसूरती को ओर भी बढा रहा था। मैं उसकी आभा में ऐसी खोई, कि एकटक उसे निहारत… more →
कुछ िदल सेkmuskan wrote 6 months ago: दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां … more →
kmuskan wrote 1 year ago: बहते- बहते जब थक गई हवा बेचारी तो आराम करने उतरी मेरे अगंना। िफर मेरी बिगया मे िकया खूब धमाल पेड पौध … more →