जनमानस सब जिंदा तो है पर मन की भावनाए मरी हुई बाहरी काया ही आकर्षित करती आत्मा दबी,जैसे कठपुतली सजी हुई किसिका किसीसे ना कोई लेना देना बस अपनी ताल में नाच नाचना खुद के लिए ही भला सोचना स्वार्थ के लिए … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: जनमानस सब जिंदा तो है पर मन की भावनाए मरी हुई बाहरी काया ही आकर्षित करती आत्मा दबी,जैसे कठपुतली सजी … more →