एक गीत बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे के तुम आ गये | कहुँ कैसे मरे जा रहे थे के तुम आ गये | हे मजिंल कहाँ और राहें ये कैसी , यूँ ही बेवजह चले जा रहे थे के तुम आ गये | कभी तो सुनू हाल-ए-दिल तुझसे तेरा ,… more →
लम्हें जिन्दगी केMaheep Saraf wrote 2 months ago: मैं मंदिर जाता हूँ हर रोज़, अब कोई मुझे शराबी नहीं कहता कलयुग हे, चलता हे; यहाँ कोई देर तक पापी नहीं … more →
mehhekk wrote 1 year ago: खुदा तेरी दुनिया में ऐसा कब होगा न किसी को भूख लगे और न उसका मन रोगा खुदा तेरी दुनिया में क्यूँ है इ … more →
pryas wrote 1 year ago: तुम नभ हो, मेघ हो, गर्जन हो, तुम धरती पर व्याप्त शक्ति, प्रजनन हो. तुम आग हो, शीतल हो, पानी हो, इस ज … more →
mehhekk wrote 1 year ago: खुदा-ए-अज़ीज तेरे दर पे एक ही बड़ी चादर चढ़ाउँ तो काफ़ी होगी न वक़्त के साथ तुझसे माँगनेवालों की दुआ … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: एक गीत बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे के तुम आ गये | कहुँ कैसे मरे जा रहे थे के तुम आ गये | हे मजिंल क … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: एक गीत बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे के तुम आ गये | कहुँ कैसे मरे जा रहे थे के तुम आ गये | हे मजिंल क … more →
mehhekk wrote 1 year ago: काटो से भरी राहे चुनकर जो चलते है अक्सर फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते | इश्क़ की मुश्किल डग … more →
mehhekk wrote 1 year ago: खुदा तेरी खुदाई की कसम जूस्तजू है अदब से एक बार रूबरू करा दे यार से एक बार | रास्ते में टकराए है उनस … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 2 years ago: जो युग बीत गया हो उसका अंजाम कहाँ से लाऊ , कलयुग मैं रहने वाला हूँ राम कहाँ से लाऊ . सीता को भी ढूँढ … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 2 years ago: जो युग बीत गया हो उसका अंजाम कहाँ से लाऊ , कलयुग मैं रहने वाला हूँ राम कहाँ से लाऊ . सीता को भी ढूँढ … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 2 years ago: पत्थर तराशता एक शक्स , खुदा से मिलने की ज़िद कर बैठा । हाथ लकीरों से भरे थे पहले , अब मगर छालो से भर … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 2 years ago: पत्थर तराशता एक शक्स , खुदा से मिलने की ज़िद कर बैठा । हाथ लकीरों से भरे थे पहले , अब मगर छालो से भर … more →