मोह किसी भी चीज़ का होता है मन अटकेलिया करता है वो फूल से फूल मंडराती तितली आँखें मिचे मधु चुराती पर फेहराए तो प्रतीत हो आस पास हज़ारों खुशियाँ लहरा रही हो तब हम स्वार्थी हो जाते है दिल में ये ख़याल आ… more →
mehekmehhekk wrote 8 months ago: मोह किसी भी चीज़ का होता है मन अटकेलिया करता है वो फूल से फूल मंडराती तितली आँखें मिचे मधु चुराती पर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: दुनिया की भीड़ में खुद को ढालना ज़रूरी होता है दो पल बैठ किनारे कभी खुद से मिलना ज़रूरी होता है … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: संसार के दुःख रूपी विष से हर किसी को है आघात यहाँ, इस विषरूपी दुःख दैत्य की क्या कोई नहीं है क … more →