mehhekk wrote 1 year ago: मनीप्लांट ख्वाहिशो की पारदर्शक बोतल को ख्वाबों के पानी से भर दिया उम्मीद का एक हरा पत्ता जड़ दिया … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तेरी याद में कितनी करवटें बदली,कितनी सिलवटें बिखरी नींद से कोसो दूर वो रात भी जागी साथ हमारे गम-ए … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.. जब संग तुम्हारे होती हूँ सनम ज़िंदगी की मंज़िले और भी करीब नज़र आती है | 2,, ये तन्हा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.आए है हम भी इस मोड़ पर अपनी महक कुछ छोड़ जाए इन ख्वाहिशो के कारवाँ में कही हमारा भी … more →