चलो भाई चारे को बोओ अक्कड मक्कड , धूल में धक्कड, दोनों मूरख, दोनों अक्खड, हाट से लौटे, ठाट से लौटे, एक साथ एक बाट से लौटे . बात बात में बात ठन गयी, बांह उठीं और मूछें तन गयीं. इसने उसकी गर्दन भींची, उ… more →
शैशवअफ़लातून wrote 9 months ago: चलो भाई चारे को बोओ अक्कड मक्कड , धूल में धक्कड, दोनों मूरख, दोनों अक्खड, हाट से लौटे, ठाट से लौटे, … more →
अफ़लातून wrote 11 months ago: आज सुबह से नल था मौन , पता नहीं कारण था कौन ? मैंने पूछा तनिक पास से , भैय्या दिखते क्यों उदास से … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: [ ‘भवानी प्रसाद मिश्र के आयाम’ , संपादक लक्ष्मण केड़िया,विशेषांक ‘समकालीन सृजन’ , २० बलमुकुंद मक्कर र … more →