विनय wrote 1 year ago: कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त कि क़तराए-ख़ूँ तक न गिरा अबकि हारे तो टूट जाये ‘नज़र’ मेरे दिलसित … more →
विनय wrote 1 year ago: जब जीना लाज़मी हो जाये तो सबको सभी को मिटाके जियो क़द कभी छोटा न हो ‘नज़र’ सबको घुटनों पर झ … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ुदा ने जब किसी को न कहा अपना ख़ुदा फिर तूने क्यों कहा ग़ैर को अपना ख़ुदा यह तो हद ही कर दी तूने, य … more →