कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त कि क़तराए-ख़ूँ तक न गिरा अबकि हारे तो टूट जाये ‘नज़र… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 7 months ago: कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त कि क़तराए-ख़ूँ … more →
विनय wrote 7 months ago: जब जीना लाज़मी हो जाये तो सबको सभी को मि … more →
विनय wrote 7 months ago: ख़ुदा ने जब किसी को न कहा अपना ख़ुदा फि … more →