एक किसान होकर मैं पूछता हूँ कि, बीज बोने से लेकर फसल काटने तक किसान, खेत मज़दूर जो जीतोड़ मेहनत करके अपनी फसल तैयार करके मंडी में बेचने ले जाता है और वहां कौड़ियों के भाव अपनी फसल बेचने के बाद खाली हाथ ल… more →
स्वार्थwrote 1 year ago: खेत जोतकर फसल बोकर कोई पहचान नहीं आत्महत्या करते ही सरकार उसे किसान कर देती है हरा सोना उगलती ज़मीन … more →
wrote 1 year ago: http://hrudyanjali.blogspot.com/2010/02/blog-post_10.html डॉ देवकुमार पुखराज भारत में संगठित किसान … more →
wrote 1 year ago: एक किसान होकर मैं पूछता हूँ कि, बीज बोने से लेकर फसल काटने तक किसान, खेत मज़दूर जो जीतोड़ मेहनत करके अ … more →
wrote 2 years ago: कविवर मैथिली शरण गुप्त झूठे थे। उन्होने पता नहीं क्या-क्या देख लिया भारत के किसानों में? हेमन्त में … more →
wrote 5 years ago: BharatKisan – Kheti, Kisan Bharat Aur Artha Vyavastha – Ek Sameeksha … more →