बुझती हुई लौ में रूकती हुई साँसों में आपके हर ग़मों के आहों में मैं नहीं मैं तो हु आपके हर अच्छे पलों का साथी नहीं में आपके ग़मों का साथी क्यूँ ? ये मैं भी न समझ पाया अब … more →
ɤȫʋʂɦɑɳ's ɯɛɓ-ɓɭӧģRoushan wrote 2 months ago: बुझती हुई लौ में रूकती हुई साँसों में आपके हर ग़मों के आहों में मैं नहीं मैं तो हु आप … more →
Roushan wrote 5 months ago: याद करने से आया कुछ याद मुझे , के कुछ रखना है याद मुझे और कुछ है जाना भूल , पर क्या … more →
Roushan wrote 5 months ago: याद करने से आया कुछ याद मुझे , के कुछ रखना है याद मुझे और कुछ है जाना भूल , पर क्या … more →
Roushan wrote 1 year ago: किसी ने क्या खूब कहा मुझपे, दिल्लगी दीवार से तो परी क्या चीज़ है कभी हमारे मन को टटोल के भी तो देखो … more →
Roushan wrote 1 year ago: किसी ने क्या खूब कहा मुझपे, दिल्लगी दीवार से तो परी क्या चीज़ है कभी हमारे मन को टटोल के भी तो देखो … more →