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Blogs about: Knot

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अश्क से पहले आँच उठती है5 comments

विनय wrote 1 year ago: अश्क से पहले आँच उठती है जब भी तुझपे आँख टिकती है बाटे हुए सब वक़्त के धागे पर उनमें अब गिरह दिखती है … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ज़िन्दगी, वक़्त, इश्क़, गिरह, Love, time, eyes, प्यार

तुमको लौट के यहीं आना है3 comments

विनय wrote 1 year ago: तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है) तुम मानो या न मानो मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है) तुम … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, दोस्त, गिरह, Heart, Love, Blame, दिल, प्यार

एक गिरह ज़ुबाँ में

विनय wrote 2 years ago: एक गिरह ज़ुबाँ में, सब के होती है वक़्त लगते ही लफ़्ज़ अटका देती है लोग क्या समझते हैं मैं ना-पाक हूँ या … more →

Tags: मेरी नज़्म, ज़हन, गिरह, दरवाज़े, तन्हा, ज़ुबाँ, Alone, लफ़्ज़, Word

और इक आह की ख़लिश देती है

विनय wrote 2 years ago: रूह बहुत बेक़रार’ बहुत बेकल है इस जिस्म से छुटकारा चाहती है अगर तुम न मिली मुझको… यह बेक़र … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, गिरह, Love, eyes, प्यार, मोहब्बत, Pain, धड़कन


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