अश्क से पहले आँच उठती है जब भी तुझपे आँख टिकती है बाटे हुए सब वक़्त के धागे पर उनमें अब गिरह दिखती है थी कभी सीधी-सादी ज़िन्दगी आज ही बिगड़ी हुई लगती है निगेबाँ है मेरा पहला इश्क़ तो फ़िक्र मुझको ख़ाक चखत… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: अश्क से पहले आँच उठती है जब भी तुझपे आँख टिकती है बाटे हुए सब वक़्त के धागे पर उनमें अब गिरह दिखती है … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है) तुम मानो या न मानो मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है) तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: रूह बहुत बेक़रार’ बहुत बेकल है इस जिस्म से छुटकारा चाहती है अगर तुम न मिली मुझको… यह बेक़र … more →