आई है बसंत बहार सर्द हवाए सुस्ताने लगी कोहरा भी धुआँ धुआँ कनक सी कीरने जाल बुनती कोयल गात नीत राग मल्हार के अब आई है बसंत बहार | हर शाख पत्तियो से सजी बेल हरियाली लहराने लगी गुलमोहर का चमन खिला कोय… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: आई है बसंत बहार सर्द हवाए सुस्ताने लगी कोहरा भी धुआँ धुआँ कनक सी कीरने जाल बुनती कोयल गात नीत राग … more →
mehhekk wrote 1 year ago: आम की बगिया लहराते हरेभरे खेत में बहती बलखाती नदिया उसके नज़दीक सजी है हमारी आम की बगिया घने घने वृक … more →