अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते | तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि || यह आत्मा अव्यक्त है, अचिन्त्य है और विकार रहित है| हे अर्जुन! इस आत्मा को इस प्रकार जानकर तेरा शोक करना उचित नहीं है|… more →
साधना विचारPraful wrote 4 months ago: ||Yoga of the Threefold Division of Qualities|| Said Arjuna: “Those who give up the scriptural … more →
aspundir wrote 10 months ago: प्राणेश्वर श्रीकृष्ण मंत्र- “ॐ ऐं श्रीं क्लीं प्राण-वल्लभाय सौः सौभाग्यदाय श्रीकृष्णाय स्वाहा। … more →
Nikhilashish wrote 10 months ago: अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते | तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि || यह आत्मा अव्यक्त … more →
Nikhilashish wrote 11 months ago: अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च | नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः || यह आत्मा अच्छेद्य … more →
Nikhilashish wrote 11 months ago: नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः | न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः || इस आत्मा को शास् … more →
Nikhilashish wrote 11 months ago: वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि | तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि … more →
Nikhilashish wrote 11 months ago: वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम् | कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम् || हे पृथापुत्र अर्जुन! ज … more →
Nikhilashish wrote 11 months ago: न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः | अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमा … more →
Nikhilashish wrote 11 months ago: य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम् | उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते || जो इस आत्मा को म … more →
Nikhilashish wrote 11 months ago: अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे | गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः || हे अर्जुन! तू न … more →
Nikhilashish wrote 11 months ago: कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम् | अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन || हे अर्जुन! तुझे इस अस … more →
pryas wrote 1 year ago: कृष्ण गोकुल से मथुरा आ गए। उनको मथुरा में कुछ भी अच्छा नहीं लगता। वहां मथुरा में उद्धव भगवान कृष्ण क … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तहु बाँसुरिया बजाओ कन्हाई राधा रानी छेड़त साज़ भगवन महू तोरी प्रीत अपनाई संसार की मोहे कौनू चिंता ना … more →
mehhekk wrote 1 year ago: काहे तूने मटकी तोड़ी वृंदावन में फिर एक नयी सुबह खिली सारी गोपिया पनिया भरन को चली राह भर बतियाती इत … more →
mehhekk wrote 1 year ago: यमुना के तट पर गोपियों का जमघट वस्त्राभूषण रख कर जलक्रीड़ा करती सब. नटखट कान्हा आए छुपता दबे पाव तब … more →